Basic Electronics ट्रान्जिस्टर

Transistor |ट्रांजिस्टर का कार्य तथा पहचान

Transistor |ट्रांजिस्टर का कार्य तथा पहचान

Transistor | ट्रांजिस्टर के बारे में आप सब ने सुना जरुर होगा और यादी आप सब Transistor के बारे में नहीं भी जानते होगे तो हम यहाँ आप सब को Transistor | ट्रांजिस्टर  केन बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं आप सब को बता देना चाहता हु की Transistor के अंदर डायोड का ही मिश्रण होता हैं |Transistor के आने से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति आ गई |
ट्रांजिस्टर दिखाई देने में एक  बहुत ही छोटा और  साधारण सा इलेक्ट्रानिक कॉम्पोनेन्ट होता है |लेकिन Transistor उपयोग  आजकल बहुत बड़े पैमाने पर लिया जाता हैं | यदि  ट्रांजिस्टर नहीं होता तो संभवतः आज हम सभी कंप्यूटर या मोबाइल के अंदर इतनी  ज्यादा   स्पीड नहीं  प्राप्त कर पाते जितनी  स्पीड आज के समय में हमें मिल  रही हैं | कहने का  तात्पर्य यह है की आज के समय में Transistor का उपयोग इतना  ज्यादा होने लगा  हैं की  हम इसके  बिना किसी इलेक्ट्रानिक सर्किट को बनाने की कल्पना भी नहीं कर सकते ।

ट्रांजिस्टर का प्रयोग किसी भी  सर्किट के अंदर  बहुत सारे  कार्यो  कोसही तरीके से  करने के लिए किया जाता हैं  लेकिन Transistor का  सबसे ज्यादा प्रयोग  एम्प्लीफिकेशन के लिए किया जाता  है।  अर्थात  किसी भी सिग्नल  को बढ़ाने के लिए Transistor का उपयोग  होता है।

 

Transistor ट्रांजिस्टर कैसे बनाया जाता हैं

Transistor ट्रांजिस्टर सेमीकंडक्टर पदार्थो की मिलाकर बनाया जाता हैं |सिलिकॉन और जेर्मेनियम का मुख्यतः प्रयोग 
 किया जाता हैं।

ट्रांजिस्टर के मुख्यरूप से तिन तीन सिरे होते है।  जिनको  बेस, कलेक्टर और एमीटर कहा जाता है।  ट्रांजिस्टर भी कई तरह के होते हैं जिनका अलग-अलग सर्किटो में कार्य के हिसाब उपयोग में लिया जाता हैं |

बनावट के अनुसार ट्रांजिस्टर मुख्यरूप से दो  तरह  के होते है 

NPN ट्रांजिस्टर  इस तरह के  ट्रांजिस्टर में P प्रकार के  क्रिस्टल के दोनों तरफ N प्रकार के  क्रिस्टल को जोड़ कर बनाया जाता हैं |इस तरह यदि किसी Transistor का P सिरा बिच में हैं तो वह NPN Transistor कहलाता हैं ।

npn

PNP ट्रांजिस्टर  इस तरह के  ट्रांजिस्टर में N प्रकार के  क्रिस्टल के दोनों तरफ P प्रकार के  क्रिस्टल को जोड़ कर बनाया जाता हैं |इस तरह यदि किसी Transistor का N सिरा बिच में हैं तो वह PNP Transistor कहलाता हैं|

pnp

दोस्तों जैसा की आप सभी ने Transistor के बारे में पढ़ा और चित्र में देखा की  Transistor किस तरह से कार्य करता हैं और किस तरह बनाया जाता हैं | आप सभी ने ऊपर पढ़ा की एक Transistor  को बनाने की लिए हमें N प्रकार और  P प्रकार के पदार्थो को  मिला कर बनाया जाता हैं |दोस्तों यदि आप डायोड के बारे में जानते होंगे तो यह भी जानते होंगे की डायोड को बनाने में भी P प्रकार और N प्रकार के पदार्थो का उपयोग किया जाता हैं | अतः हम दो डायोड को एक साथ जोड़ते हैं तो भी एक Transistor बन जाता हैं इसके लिए हमें डायोड के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिये |

Transistor को मल्टीमीटर से कैसे चेक करे :-Transistor को मल्टीमीटर से चेक करना काफी आसान हैं इसके लिए हमें मल्टीमीटर के दोनों नोब को Transistor के किसी भी दो सिरों पर लगाना होता हैं यदि हम मल्टीमीटर के red नोब को Transistorके बिच वाले सिरे पर रखते हैं तो मल्टीमीटर के black नोब को Transistor के दोनों   किनारे के सिरों पर एक -एक कर के लागयेगे यदि मल्टीमीटर दोनों सिरों पर लगाने पर शोर्ट बताता हैं तो हम इसके बाद मल्टीमीटर के black नोब को Transistor के बिच वाले सिरे पर रख कर चेक करेंगे तो ओपन बताना चाहिए तो Transistor सही हैं और यह npn Transistor  हैं  इस तरह हम मल्टीमीटर से यह पता  लगा सकते हैं की Transistor PNP हैं या npn हैं| ठीक इसी तरह हम npn Transistor को भी चेक कर सकते हैं  |

नोट :- Transistor को चेक करते समय यदि मल्टीमीटर का +अर्थात रेड नोब Transistor के P छोर पर जाती हैं और मल्टीमीटर की -अर्थात black नोब Transistor के N सिरे पर जाती हैं तो शोर्ट बताता हैं |

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